श्री नारायणी दादी परिवारBengaluru
॥ जय दादी की ॥
RSD104

बनड़ी सी लागो थे माँ,तारा टाबर निरखे

Rani Sati Dadi
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बनड़ी सा लागो थे माँ,थारा टाबर निरखे,
टाबर निरखे,थारा सेवक निरखे,
बनड़ी सी लागो थे माँ,तारा टाबर निरखे

मोटी मोटी आंख्या,थारो तेज है निरालो,
सोने री या नथ,माथे बोरलो यो प्यारो,
चांद स सुंदर थारो,चांद स सुंदर थारो
मुखड़ो चमके,
बनड़ी सी लागो थे माँ,तारा टाबर निरखे

बंधेज री या साडी,देखो लाल सुरँगी,
माथे ऊपर सोए थारे तारा री या चुनरी,
आंख्या में बस गई दादी,आंख्या में बस गई दादी,
सुरत या थारी,
बनड़ी सी लागो थे माँ,तारा टाबर निरखे

सरब सुहागण थारे,मन्दिरये में आई
सब मिल थारे दादी,मेहंदी ये लगाई,
भक्ता री मेहंदी दादी,भक्ता री मेहंदी दादी,
लागे थाने प्यारी,
बनड़ी सी लागो थे माँ,तारा टाबर निरखे

चुन चुन फुल दादी,गजरो बनायो
पहनो म्हारी दादी,आशीष मन सु यो लायो,
सब मिल थाने सजावा,सब मिल थाने सजावा,
बैठो म्हारी माँ,
बनड़ी सी लागो थे माँ,तारा टाबर निरखे

आशीष तुलस्यान

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